पैसिव-अग्रेसिव
ठीक है। जो आपको सबसे अच्छा लगे।
मन की बात कभी सीधे नहीं कही जाती। तंज़ के पार जाकर बात करें।
कठिननिखरने वाले गुणजुड़ाव
इस विरोधी के साथ प्रैक्टिस करेंइनका तरीक़ा
वे आपसे नाराज़ हैं, और उनकी चाहत है कि आपको यह पता चले, पर उन्हें कभी कहना न पड़े। इसलिए बात घुमा-फिराकर निकलती है: एक छोटा-सा “वाह।”, धार वाली तारीफ़, एक “कुछ नहीं, मैं ठीक हूँ” जिसमें साफ़ दिखता है कि कुछ ठीक नहीं। हर बात से मुकरा जा सकता है, इसलिए अगर आप लहजे पर प्रतिक्रिया दें, तो मसला खड़ा करने का दोष आप पर आता है। यही इस तरीक़े की ताक़त है। आख़िर में शिकायत का अंदाज़ा लगाना, उन बातों की माफ़ी माँगना जिनका उन्होंने कभी नाम तक नहीं लिया, और उनका ग़ुस्सा ढोना, सब आपके हिस्से आता है, जबकि उनकी शांति और बेगुनाही बनी रहती है।
इनके बोल
वाह। ठीक है।
कुछ नहीं। मैं ठीक हूँ।
अच्छा, आख़िरकार तुम्हें इसके लिए वक़्त मिल ही गया। बढ़िया।
क्या काम आता है
उन्हें सबसे ज़्यादा डर एक सीधे, शांत सवाल से लगता है: असल में गड़बड़ क्या है? जो दिख रहा है, उसे बिना इल्ज़ाम लगाए कहें, फिर पूछें। आवाज़ सधी हुई रखें और शब्द सीधे। पहली बार में शायद वे एक और “मैं ठीक हूँ” कहकर बात टाल दें। तंज़ के पीछे न भागें, न लहजे पर बहस करें। फिर से पूछें, थोड़ा और प्यार से, और जवाब के लिए जगह छोड़ें। हर शांत दोहराव के साथ उनके लिए घुमावदार रास्ते पर टिके रहना और मुश्किल होता जाता है। जब आख़िरकार बात सामने आए कि उन्हें चुभा क्या, तो जवाब देने से पहले पूरी बात सुनें।
आप कहेंतुमने कई बार कहा कि तुम ठीक हो, पर लगता नहीं कि सब ठीक है। असल में क्या खल रहा है? मुझे बता दो, यही बेहतर है।
क्या उल्टा पड़ता है
तंज़ का जवाब तंज़ से देना इसे रूखेपन की होड़ बना देता है। उन पर पैसिव-अग्रेसिव होने का इल्ज़ाम लगाने से उन्हें आसानी से इनकार का मौक़ा मिलता है, और हमलावर का ठप्पा आप पर लग जाता है। अनदेखा करने का दिखावा उन्हें सिखाता है कि घुमावदार रास्ता सुरक्षित है। जिस बात का उन्होंने कभी नाम तक नहीं लिया, उसके लिए बार-बार माफ़ी माँगना चुप्पी को इनाम देता है और असली समस्या को जस का तस छोड़ देता है।
पता नहीं, किस तरह की बातचीत आपसे टलती रहती है? कॉन्फ़्लिक्ट स्टाइल क्विज़ दें।
मुफ़्त प्रैक्टिस मुक़ाबला
पहले हाँ, फिर मुकरना
मीटिंग में आपके सहकर्मी ने आपके प्लान पर हामी भरी। घंटे भर बाद टीम को उनका एक लंबा मैसेज मिला, “कुछ चिंताओं” के बारे में, जो आपके सामने कभी नहीं रखी गईं। अब लोग उस पर जवाब दे रहे हैं।
यह मुक़ाबला मुफ़्त खेलें“नहीं, सब ठीक है”
पिछले हफ़्ते आपने दोस्त के साथ प्लान रद्द किया। तब से जवाब छोटे हैं और थोड़ी देर से आते हैं। पूछने पर कि कुछ गड़बड़ है क्या, जवाब मिलता है “नहीं, सब ठीक है”।
यह मुक़ाबला मुफ़्त खेलें“रहने दो, मैं ही कर दूँ”
आपने कहा था कि इस वीकेंड यह काम आपके ज़िम्मे है। पार्टनर ने पहले ही ज़ोर-शोर से काम शुरू कर दिया है, और साथ में ताना: “तुम फ़िक्र मत करो, यह मुझसे ही हो जाएगा।”
यह मुक़ाबला मुफ़्त खेलें
स्थिति
- मध्यम
ताने वाला नोट
टीम के एक साथी की ओर से आपके काम पर घुमा-फिराकर तंज़ कसे जा रहे हैं। अब सीधी बात का समय है।
गाइड पढ़ें (अंग्रेज़ी में): How to respond to passive-aggressive comments